विवाह के एक वर्ष पश्चात
ससुराल में विवाह के एक वर्ष बीत जाने के बाद शादी की वर्षगाँठ बड़े धूमधाम से मनाई जाती है. इसमें वर पक्ष के सभी रिश्तेदार तथा बहू के मायके वालों को आमंत्रित किया जाता है. इसमें शामिल होने के लिए बहू के मायके वालों का बुलाया जाना भी एक अच्छा तथा स्वागत योग्य कदम होता है. बहू के मायके वाले अपनी बेटी के लिए एक अच्छा सा उपहार लेकर अपना आशीर्वाद देने के लिए आते हैं. अन्य रिश्तेदारों तथा मित्रों आदि को भी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर बड़े आदर-सत्कार से बुलाया जाता है. वे भी विभिन्न प्रकार के उपहार लेकर अपना आशीर्वाद देने आते हैं. शादी के बाद एक वर्ष बिताने के पश्चात विवाहिता को अपने पति तथा घर के अन्य सदस्यों के स्वभाव के बारे में पूरी तरह से पता चल चुका होता है. वो सबकी पसंद तथा नापसंद आदि के बारे में भी अच्छे से जान जाती है. वो अपने को उनके व्यवहार के अनुसार ढालने का प्रयत्न कर चुकी होती है. अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी को सफल बनाने का ये सबसे बड़ा मूलमंत्र है. परिवार को संयुक्त परिवार की तरह चलाना ही अच्छा होता है नाकि उसे तोड़कर एकल परिवार के रूप में चलाना. संयुक्त परिवार के अनेकों लाभ होते हैं...