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नारी का दुखी जीवन- दोषी कौन ?

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  शादी के बाद एक भारतीय नारी का जीवन नारकीय हो जाता है. ये अक्सर कई मामलों में देखा गया है. लड़की शादी के पहले अपने माँ-बाप के लाड प्यार में अपना बचपन बिताती है. वे उसके अपने सगे होते हैं और उसका जान से ज्यादा ख्याल भी रखते हैं. आजकल देखा गया है कि शादी के बाद अधिकतर मामले में उसके मायके वालों से अक्सर अधिक दहेज़ की मांग करते रहते हैं. जब उनकी अधिक दहेज़ की मांग उसके मायके वालो द्वारा पूरी करने में अपनी असमर्थता दर्शाते हैं तो वो शादीशुदा महिलायों को हर तरह से प्रताड़ित करते हैं. कई दिनों तक भूखे पेट रखते है. एक मामले में यहाँ तक देखा गया कि ससुराल वाले उसे कुत्ते की जंजीर में बांधकर तरह-तरह की यातनाएं देते हैं. हमारे देश के महिला आयोग ने नारी के दुखी जीवन से छुटकारा दिलाने में काफी काम किया है लेकिन यह ऊंट के मुहं में जीरा जैसा है. इतने विशाल देश में हम सभी नारियों को उनके दुखी जीवन से छुटकारा नहीं दिला पाए हैं. हमारी केंद्रीय सरकार द्वारा विभिन्न प्रदेशों की नारियों को उनके दुखों से निजात दिलाने की ओर और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है. अक्सर देखा गया है कि जब एक पत्नी को उसकी सास...

घरेलू हिंसा के तमाम मुक़दमे फर्जी भी होते हैं

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498-A के घरेलू हिंसा के तमाम मुकदमें फर्जी भी होते हैं. कन्या के मायके वाले जब वर पक्ष को परेशान करना चाहते हैं तब वो इस धारा का सहारा लेकर कन्या के ससुराल वालों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दायर कर उनको जेल भिजवा देते हैं तथा उन्हें जमानत भी नहीं मिलती. गहन जांच के पश्चात पता चलता है कि वर पक्ष वालों की बेजा दहेज़ मांग से परेशान होकर उनसे हिसाब चुकता करना चाहते है इसलिए ऐसा अजीब काम किया. अदालतों में जो तरह-तरह के मुकदमें विचाराधीन हैं सरकार को चाहिए कि दूसरी जांच एजेंसी द्वरा परीक्षण कर उनका निपटारा किया जाये. दोनों पक्ष के वकील   यही चाहते हैं कि ऐसे मुकदमों का जल्दी निपटारा न हो तथा उन्हें अपनी फीस लगातार मिलती रहे. यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि हम इस तरह के कानूनों को समाप्त करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते. मैं चाहता हूँ कि देश तथा प्रदेश की सरकारें इस लाइलाज बीमारी का शीघ्र से शीघ्र समाधान ढूँढने का प्रयत्न करें.